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 “CBSE OSM मूल्यांकन” में गड़बड़ी, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब,

CBSE OSM मूल्यांकन

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (OSM) सिस्टम में कथित खामियों और मूल्यांकन में हुई गड़बड़ियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को केंद्र सरकार और CBSE से इस मामले में विस्तृत जवाब और संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है।

अदालत विशेष रूप से इस बात की जांच कर रही है कि क्या प्रभावित छात्रों को राहत देने के लिए शिकायत विंडो (Grievance Window) फिर से खोली जानी चाहिए या नहीं।

क्या है पूरा विवाद और छात्रों की शिकायतें?

यह विवाद CBSE की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली से जुड़ा है, जहां उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल स्कैनिंग और मूल्यांकन में कई तकनीकी खामियां सामने आई हैं। एक जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से आरोप लगाया गया है कि इन डिजिटल गड़बड़ियों के कारण बड़ी संख्या में छात्रों के अंक प्रभावित हुए हैं।

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि:

सीमित समय: शिकायत दर्ज करने के लिए दिया गया एक सप्ताह का समय 1.68 लाख प्रभावित छात्रों के लिए बहुत कम था।

लंबित समाधान: कई छात्रों ने शिकायत दर्ज तो की, लेकिन उन्हें अब तक न तो उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं और न ही पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) का परिणाम।

करियर पर असर: कई छात्रों ने JEE Main जैसी कठिन प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली हैं, लेकिन CBSE मूल्यांकन में कम अंक (Minimum Marks Criteria) मिलने के कारण उनके एडमिशन पर संकट खड़ा हो गया है।

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    केंद्र सरकार का पक्ष: IIT और अन्य परीक्षाएं टालना संभव नहीं

    सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने केंद्र और CBSE का पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि शिकायतों की जांच के लिए पहले ही एक सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति की सिफारिश पर ही एक सप्ताह के लिए शिकायत समाधान पोर्टल खोला गया था, जिसके माध्यम से लगभग 1.68 लाख छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन किया गया।

    विंडो दोबारा खोलने की मांग पर एसजी मेहता ने कहा कि CBSE के परिणाम देश की कई बड़ी प्रवेश परीक्षाओं (जैसे IIT-JEE, NEET) और कॉलेज एडमिशन से सीधे तौर पर जुड़े होते हैं। ऐसे में शिकायत अवधि को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाना या प्रवेश परीक्षाओं को टालना संभव नहीं है।

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    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और अगली सुनवाई

    सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने स्पष्टीकरण मांगा कि छात्रों की शिकायतें सामान्य पुनर्मूल्यांकन को लेकर हैं या विशेष रूप से OSM सिस्टम की तकनीकी गड़बड़ियों के कारण हैं। जस्टिस वी. मोहना ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा सीधे तौर पर छात्रों के करियर और मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के एडमिशन से जुड़ा है।

    सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:

    केंद्र को हलफनामा: केंद्र सरकार को सोमवार तक सभी विवरणों और सरकार से चर्चा के बाद एक विस्तृत हलफनामा कोर्ट में पेश करना होगा।

    याचिकाकर्ता को निर्देश: याचिकाकर्ता को एक टेबल के रूप में जवाब (Rejoinder) दाखिल करना होगा। इसमें छात्रों को कैटेगरी में बांटना होगा (जैसे- जिन्होंने शिकायत की पर जवाब नहीं मिला, जिन्हें री-इवैल्यूएशन का रिजल्ट नहीं मिला, और जो इंटरनेट न होने के कारण अप्लाई नहीं कर पाए)।

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    अब सोमवार को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या मौजूदा शिकायत प्रणाली पर्याप्त है या छात्रों के करियर को बचाने के लिए CBSE को और कोई राहत देनी होगी।

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